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अपने रिश्तों के बनाये रखने के लिए ये है ध्यान रखने वाली चीज़ें

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रिश्तों में आदान-प्रदान बहुत मायने रखता है, ये वो बंधन है जिसे दो लोग शेयर करते हैं, जहाँ सम्मान, मान्यताएँ, अनुभव, परिवार के अलावा बहुत सी बाहरी चीज़ें जैसे इंटरनेट, सोशियल मीडिया, फेसबुक, ट्वीटर और आजकल के दौर की चीज़ें रिश्तों पर छोटे-बड़े प्रभाव डालती हैं। दो साथियो के बीच रिश्ता उन्हें आपसी प्यार, सम्मान और भरोसे के बंधन में बांधे रखता है। सच्चाई और खुलेपन की नींव किसी भी गलतफहमी, जो इस रिश्ते को नुक़सान पंहुचा सकती है, को मिटा देती है। जब रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है तो इसके संकेत तुरंत नहीं मिलने लगते, पर जिस दिन आपको इसके बारे में पता चलता है तो इससे होने वाली क्षति अपूरणीय हो जाती है।

जब तक आप अपने साथी को इस रूप में स्वीकार करते हैं तब तक बड़ी क्षति हो चूकी होती है, आप हर बात पर हर समय उनकी गलती निकालते रहते है और उन्हें ‘अच्छे’ के लिए बदलने को कहते हैं। इस गलतफहमी की ओर अक्सर ध्यान न देना गलत है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत होती है। पर अपनी चुप्पी को तोड़ने के लिए अंतर्मुखी स्वभाव से एकदम पार्टी जैसी बहिर्मुखी परिस्थिति में बदलना आपके रिश्ते को मजबूती से आगे नहीं बढ़ाएगा। आप अपने साथी को ‘अपनी जरूरत के अनुसार’ नहीं ढाल सकते। इसके अलावा कोई भी आदमी सम्पूर्ण नहीं होता, अगर कोई हो भी तो उसकी कोई कीमत नहीं है जब तक आप परिपक्व न हों।

यदि आप अपने इन संबंधों का प्रदर्शन सार्वजानिक रूप से करेंगे या सार्वजनिक रूप से लड़ेंगे तो ये आपके रिश्ते को बर्बाद कर देगा। यदि आपको अपने रिश्ते की परवाह है तो अपने विवादों को घर तक ही सीमित रखें। वास्तव में एक स्वस्थ बहस, जहाँ आप अपने अंदर की बातों को बाहर निकाल देते हैं और आपके दिल का मैल बाहर निकल जाता है, आपको और मजबूत बनाएगी।

अपने रिश्तों की शैली पर ध्यान दें कि क्या आप दूसरे पर निर्भर हैं ( जरूरतमंद हैं) या एक दूसरे की जरूरत महसूस करते हैं ( एक दूसरे को चाहते है) या सह-निर्भर ( झगडे से बचने वाले) या आपस में मिलकर सहयोग करने वाले हैं? एक दूसरे पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना, दो साथियो का एक दूसरे पर निर्भर रहना, एक स्वस्थ दायरा न खींच पाना या एक दूसरे से कुछ न कह पाना आपके प्यार के बंधन को चोट पहुंचा सकता है। इसके अतिरिक्त जब दो साथी आत्मनिर्भर रहते हैं तो ववेक दूसरे के करीब आना चाहते हैं, भले ही वो दोनों अकेले खड़े होने में सक्षम हैं। ये चीज़ आपके रिश्तों को और मजबूत बनाती है। जब आप अपने दिल को पहुँचने वाली ठेस, दर्द, झगडे गिनना शुरू कर देते हैं और क्षमा करना भूल जाते हैं तो आप मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा देते हैं और जब ईर्ष्या आप पर हावी होने लगती है तो परिस्थिति को संभालना मुश्किल हो जाता है और इससे  केवल आपके दिल को आघात पंहुचेगा।

एक छोटा बच्चा भी आपको बता सकता है कि झूठ बोलना और किसी बात को छुपाना बुरी बात है। तो अपने रिश्तों को आगे बढ़ाएं और अपने साथी को कुछ साथ रहने का कुछ समय निकालें जिससे आप दोनों और करीब आएंगे। यदि आप अपने रिश्तों को सुरक्षित रखते हैं तो आप रिश्तों की जमा-पूँजी एकत्र करते हैं और छोटी-छोटी चीज़ों की अनुमति आपको आपके साथी के साथ और सहज बनाती हैं।

इस बात को भूलें की आपका रिश्ता क्या है और आपको अपना साथी क्यों प्यारा लगता था। आत्मविश्वाशी बनें जिससे आपके रिश्तों में भी आत्मविश्वास झलके। हर व्यक्ति स्वतंत्र, सक्षम और विश्वास से भरा साथी चाहता है।

यदि आप बच्चों में फसें हुए हैं तो उनके पैदा होने के बाद आपको अपना वैवाहिक जीवन बोर लगने लगता है। याद रखें कि आप वही रोमांचक जोड़ी है जिसके बीच बहुत अच्छा तालमेल है और आपकी इस स्थिति के बदलने का कोई कारण नहीं है।

वो चीज़ जो आपके रिश्तों को बना या तोड़ सकती है वो आप दोनों ही हैं।